विद्रोह जरुरी है


          तब विद्रोह जरुरी है (अभिषेक मिश्र)



जब सूरज संग हो जाए अंधियार के, तब दीये का टिमटिमाना जरूरी है
जब प्यार की बोली लगने लगे बाजार में, तब प्रेमी का प्रेम को बचाना जरूरी है
जब देश को खतरा हो गद्दारों से, तो गद्दारों को धरती से मिटाना जरूरी है
जब गुमराह हो रहा हो युवा देश का, तो उसे सही राह दिखाना जरूरी है

जब हर ओर फैल गई हो निराशा देश में, तो क्रांति का बिगुल बजाना जरूरी है
जब नारी खुद को असहाय पाए, तो उसे लक्ष्मीबाई बनाना जरूरी है
जब नेताओं के हाथ में सुरक्षित न रहे देश, तो फिर सुभाष का आना जरूरी है
जब सीधे तरीकों से देश न बदले, तब विद्रोह जरूरी है

                                                        – अभिषेक मिश्र

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