खातिर सरहद की बर्फ में मरे रहे हैं



जहाँ हम और तुम हिन्दू-मुसलमान के फर्क में मर रहे हैं,
कुछ लोग हम दोनों के खातिर सरहद की बर्फ में मरे रहे हैं


हर वक़्त मेरी आँखों में धरती का स्वप्न हो, जब कभी मरू तो तिरंगा मेरा कफ़न हो, और कोई ख्वाहिश नहीं है ज़िन्दगी में, जब कभी भी जन्मु तो भारत मेरा वतन हो||


मैं भारत बरस का हरदम सम्मान करता हूँ, यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हुँ, मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की, तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ.

किसी गजरे की खुशबु को महकता छोड़ आया हूँ,
मेरी नन्ही सी चिड़िया को चहकता छोड़ आया हूँ,
मुझे छाती से अपनी तू लगा लेना ऐ भारत माँ,
मैं अपनी माँ की बाहों को तरसता छोड़ आया हूँ।
जय हिन्द…


कुछ हाथ से मेरे निकल गया,
वो पलक झपक के छिप गया,
फिर लाश बिछ गयी लाखों की,
सब पलक झपक के बदल गया।
जब रिश्ते राख में बदल गए,
इंसानियत का दिल दहल गया,
मैं पूछ पूछ के हार गया,
क्यूँ मेरा भारत बदल गया?


यही खुवाहिश खुदा हर जन्म हिन्दुस्तान वतन देना, अगर देना तो दिल में देशभक्ति का चलन देना, न दे दोलत न दे शोहरत, कोई शिकवा नही हमको, झुका दूँ सर मै दुश्मन का यही हिम्मत का घन देना, अगर देना तो दिल में देशभक्ति का चलन देना..!

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