आँसू नमकीन क्यों है

चाहत वो नहीं जो जान देती है,
चाहत वो नहीं जो मुस्कान देती है,
ऐ दोस्त चाहत तो वो है,
जो पानी में गिरा आँसू पहचान लेती है।

बहुत चाहा उसको जिसे हम पा न सके,
ख्यालों में किसी और को ला न सके,
उसको देख के आँसू तो पोंछ लिए,
लेकिन किसी और को देख के मुस्कुरा न सके।

मुझे न जाने उस पर इतना यकीन क्यों है,
उसका ख्याल भी इतना हसीन क्यों है,
सुना है प्यार का दर्द मीठा होता है,
तो आँख से निकला आँसू नमकीन क्यों है।

एहसास बहुत होगा जब छोड़ के जायेंगे,
रोयेंगे बहुत मगर आँसू नहीं आयेंगे,
जब साथ ना दे कोई तो आवाज़ हमे देना,
आसमान पर भी होंगे तो लौट आयेंगे।

वो कह के चले इतनी मुलाकात बहुत है,
मैंने कहा रुक जाओ अभी रात बहुत है,
आँसू मेरे थम जाये तो फिर शौक से जाना,
ऐसे में कहाँ जाओगे बरसात बहुत है।

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